
पीड़िता का आरोप शिकायत के बाद भी पुलिस कर रही मनमानी
रायबरेली। सरेनी पुलिस कार्यशैली आए-दिन सवालों के घेरे में रहती है। चाहे वह पशु तस्करी का मामला हो, बाइक चोरी का मामला हो या फिर जमीन संबंधी शिकायतें हों। सरेनी पुलिस पीड़ित की जगह विपक्षी का साथ देती खड़ी नजर आती है। इसकी बानगी एक बार फिर देखने को मिली है। गेगासों में प्रजापिता ब्रह्मकुमारी की साध्वी के पिता के मकान पर कब्जा किया जा रहा है। वहीं पुलिस दूसरे पक्ष के साथ खड़ी है। फर्जीवाड़ा कर जमीन का बैनामा कराकर कब्जा करने वाले साध्वी और उसके भाइयों को घर से बेघर करने पर तुला है। जब शिकायत पुलिस से की गई तो पुलिस ने जमीन के कागजात और रजिस्ट्री को देखे बिना ही साध्वी को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। यही नहीं शांतिभंग की आशंका को लेकर नामजद कर दिया है। पीड़ित साध्वी ने मुख्यमंत्री से मामले की शिकायत करने का निर्णय लिया है।
सरेनी के ग्राम पूरे बैसन मजरे गंगागंज गेगासों में 16 जून 1985 को लक्ष्मी शंकर ने राम चरन से जमीन एक बिस्वा जमीन खरीदी थी। जमीन का गाटा संख्या 532 है तथा सात हजार 600 रुपये में जमीन का इकरारनामा के साथ नोटरी की गई। नोटरी में राम चरन के साथ राम स्वरूप और हरिहर सिंह गवाह बने। नोटरी न्यायालय सिविल जज डलमऊ कोर्ट में हुई। सब कुछ ठीक चलता है लेकिन 12 जून 2023 को एक नया मोड़ आ गया। स्व राम चरन के नाती महादेव ने बिना किसी कागजी कार्रवाई के अपनी मनमर्जी से लक्ष्मीशंकर की जमीन को पत्नी कांति देवी को दान कर दी। साध्वी सुधा का आरोप है कि उनके पिता जमीन खरीदी थी जिस पर मकान बना है तथा दो दुकानें है। उस पर फर्जीवाड़ा कर कृष्ण कुमार साहू बैनामा कराकर कब्जा करना चाहता है। इसमें पुलिस भी मिली हुई है। बताया कि 27 अगस्त को घर का ताला तोड़ दिया गया जिसकी शिकायत सरेनी कोतवाली में की गई तो पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। वहीं बार-बार कोतवाली जाने पर फर्जी मुकदमें में भाई मुकेश को जेल भेजने की धमकी दी गई। 14 सितंबर को कोतवाली प्रभारी मौके पर पहुंचे और मकान छोड़ने की बात कर चलते बने। न कोई कागजात देखा न ही विपक्षी की करतूत। साथ ही 15 सितंबर को धारा 107/116 के तहत कार्रवाई भी की। आईजीसीआर की रिपोर्ट भी एकतरफा लगा दी गई।
इनसेट
महादेव को जमीन बेचने का अधिकार किसने दिया
पुलिस को यह गौर करना चाहिए कि जब जमीन राम चरन ने लक्ष्मी शंकर को 1985 में बेंच दी तो उसका नाती महादेव जमीन का वारिस कैसे हो सकता है और महादेव जमीन को बिना कागज के अपनी पत्नी को दान कैसे कर सकता है। इससे साफ है कि मामले में खेल किया जा रहा है। वहीं पुलिस एकतरफा होकर असल कार्रवाई से मुंह फेर रही है। असल में जिस जमीन पर साध्वी का मकान बना है वह बेशकीमती है और उसके बगल में कृष्ण कुमार का मकान है। जिससे साफ है कि हर किसी की निगाह जमीन पर है।
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