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क्रोध पर विजय पाकर अहंकार को त्याग मन को करें शुद्ध

— जैन समाज की ओर से पर्युषण महापर्व के सातवें दिन मंदिर में पूजा अर्चना

रायबरेली : जैन समाज के पर्युषण महापर्व के सातवें दिन सोमवार को जैन मंदिरों में उत्तम तप धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की गई। सुबह छह बजे मंदिर में भगवान का अभिषेक करने के साथ ही शांतिधारा, दशलक्षण मंडल की पूजा की गई। समाज के अध्यक्ष सुनील जैन ने उत्तम तप धर्म के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पर्युषण पर्व में क्रोध पर विजय पाकर अहंकार को त्याग कर सरलता अपनाते हुए मन की शुद्धि के साथ सत्य को प्राप्त करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि सत्य के दीपक को संयम रूपी चिमनी से सुरक्षित करने की कोशिश करनी चाहिए। हीरा पाकर सुरक्षित भी रख लेने से हीरा चमकदार नहीं होता है। हीरे को चमकदार बनाने के लिए उसे तराशना पड़ता है। उसी प्रकार मानव जीवन को तराशने की प्रक्रिया ही तप है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन में आने के साथ ही हमें आत्मा रूपी हीरा मिल जाता है। मगर मुक्ति रूपी चमक पाने के लिए तप की आवश्यकता होती है। आधुनिक विज्ञान ने विषय भोग की बहुत ज्यादा सुख-सुविधाएं उपलब्ध करवा दी। इससे अब मनुष्य का ध्यान शरीर को छोड़कर आत्मा की तरफ जाता ही नहीं है। इस कारण संसार में वैराग्य पाना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा कि वैराग्य की प्राप्ति आत्मा को दोषों से छुटकारा दिलाने के लिए तप बहुत आवश्यक है। मीडिया प्रभारी अंकित जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व को लेकर सोमवार शाम को जैन मंदिर में धार्मिक नाटक का मंचन किया गया। वहीं मंगलवार को मंदिरों में उत्तम त्याग धर्म की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
अनिल जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व को लेकर चल रहे अनन्त चतुर्दशी तक होने वाले धार्मिक आयोजनों के तहत अब तक दस मंडल विधान की सात पूजा पूर्ण हो गई है। अशोक जैन, हेमेंद्र जैन, संजय जैन, संजीव जैन, राकेश जैन, अनिल जैन, नितेश जैन, नितिन जैन, अरिहंत जैन, विकास जैन, रमेश जैन, अतुल जैन, अजय जैन, सनी जैन, पूजा जैन, रुचिका, स्वाति, अनुराधा,अनीता, नीरू, इंदु, शारदा, रेखा आदि मौजूद रहे।