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रायबरेली में इंस्टिट्यूट की छात्राओं ने प्रबंधतंत्र पर लगाया शोषण का आरोप

– कृपालु इंस्टिट्यूट ऑफ बायो मेडिकल साइंस की दो छात्राओं ने डीएम से लगाई गुहार

रायबरेली: पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट में पढ़ने वाली दो छात्रों ने प्रबंध पर शोषण का आरोप लगाया है। मामले को लेकर दोनों छात्राओं ने डीएम हर्षिता माथुर मुलाकात की तथा समस्या को सामने रखा इस पर डीएम ने जांच के निर्देश दिए हैं।

मामला भदोखर थाना इलाके में मुंशीगंज के कृपालु इंस्टिट्यूट ऑफ बायो मेडिकल साइंस का है। यहां की दो छात्राओं ने डीएम को शिकायती पत्र देते हुए आरोप लगाया है कि उनके हिन्दू प्रतीकों पर हमला किया गया है। यहां सिंदूर और बिंदी लगाने पर पाबंदी लगाई जा रही है। छात्राओं ने यहां तक कहा कि प्रैग्नेंन्सी के दौरान गर्भपात कराये जाने का भी दबाव बनाया गया है। छात्रा ने कहा कि अबॉर्शन न कराये जाने की स्थिति में उनका पंजीकरण निरस्त कर दिया गया और फीस भी वापस नहीं कि जा रही है। साथ ही चेकिंग के नाम पर अभद्रता की जाती है। डलमऊ की रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि वह एएनएम प्रथम वर्ष की छात्र है तथा पहले सेमेस्टर के लिए 80 हजार रुपये फीस जमा की है। उसके बाद भी उसे पढ़ने नहीं दिया जाता है। चेकिंग के नाम पर उसके साथ अभद्रता की जाती है। बताया कि पूरे कोर्स की फीस 2.35 लाख रुपये हैं। आरोप यह भी लगाया कि यदि किसी दिन कोई छात्र अनुपस्थिति रहती है तो आवेदन पत्र देने के बाद भी 7 हजार रुपये फाइन में लगाए जाते हैं। वहीं मोजा या अन्य कोई ड्रेस न पहने पर भारी भरकम फाइन लगाया जाता है। संदी नागिन की रहना वाली छात्रा ने बताया कि वह शादी शुदा है और उससे कहा जाता है कि वह सिंदूर लगाकर न आए। इस समय वह गर्भवती है तो कहा गया कि इस तरह से उसे क्लास में नहीं बैठने दिया जाएगा। या तो वह गर्भपात करा ले या कोई दूसरा रास्ता तय करे। कहा गया कि फीस वापस कर दो तो उसे भी वापस नहीं किया जा रहा है। संस्थान में प्रबंधन का काम देख रहे अमित सिंह का कहना है कि सिंदूर या बिंदी लगाने पर कोई पाबंदी नहीं है। बस गहरा सिंदूर न लगा हो क्योंकि इससे मरीज पर झड़ने का खतरा रहता है। गर्भावस्था को लेकर लगाये गए आरोप के संबंध में कहा गया है कि छात्रा ने स्वयं गर्भावस्था के चलते अटेंडेंस पूरी न होने की संभावना के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराया है और नियम विरुद्ध फीस मांग रही हैं। फीस वापस मिलने में हो रही देरी के चलते दबाव बनाने को लेकर ही दोनों छात्राओं ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। जबकि सौ रुपए के स्टांप पेपर पर दोनों छात्राओं ने शपथ पत्र पर लिखकर दिया है कि 75 फीसद से कम उपस्थिति पर उन्हें वार्षिक परीक्षा से अलग रखा जाए। जमाराशि की वापसी की मांग नहीं की जाएगी।

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दो छात्राओं ने इंस्टिट्यूट के खिलाफ शिकायत की है जिस पर डिप्टी कलेक्टर को जांच के लिए निर्देश दिए हैं। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

हर्षिता माथुर

डीएम, रायबरेली