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सुंदरकांड का पाठ, श्रद्धालुओं ने खूब छका प्रसाद

शशांक सिंह राठौर
रायबरेली: श्रीआस्तिक मुनि मंदिर देदौर के चतुर्थ पुनर्निर्माण पूर्ण होने पर सुंदरकांड और भंडारा का आयोजन किया गया। सुबह सुंदरकांड पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद हवन, कन्या भोज, साधु संतों को प्रसाद ग्रहण कराया गया। इस दौरान कार्यक्रम में सहयोग करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। भंडारा में देर रात तक लोगाें ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान करीब 15 हजार श्रद्धालुओं ने प्रसाद छका।

सदर एसडीएम मिथिलेश त्रिपाठी ने भी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर आस्तिक स्वामी का प्रसाद ग्रहण किया। देदौर आस्तिक मुनि सेवा समिति की ओर से ने एसडीएम को सम्मानित करते हुए आभार प्रकट किया गया। समिति अध्यक्ष हरिप्रसाद ने समस्त ग्रामवासियों, कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले सदस्यों और भंडारे में शामिल हुए लोगों का आभार जताते हुए बताया कि अर्जुन के पुत्र परीक्षित के बेटे जनमेजय ने सर्प यज्ञ करके बड़ी संख्या में सांपों को जिंदा जलाने का निर्णय लिया। अपने पिता परीक्षित को हत्या का बदला नागवंशियों से लेने की जानकारी होने पर सर्पों ने जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान श्री आस्तिक स्वामी ने कुछ सांपों को बचा लिया। इस पर सर्पराज ने कहा कि श्रीआस्तिक स्वामी के उपासकों को कभी सांपों अथवा किसी जहरीले जीव से डरने की आवश्यकता नहीं होगी। उनका जहां भी नाम बोला जाएगा, वहां किसी को सांपों का कोई भय नहीं होगा।