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पहले जी-20 अब एनसीईआरटी में इंडिया बनाम भारत, कमेटी ने बदलाव की सिफारिश

– देश के नाम को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज, इंडिया के बजाय भारत लिखे जाने की बढ़ने लगी मांग

नई दिल्ली: पहले जी-20 समिट अब एनसीईआरटी में इंडिया बनाम भारत को लेकर एक बार फिर राजनीतिक गलियारे में चर्चा होने लगी है। इसकी वजह एनसीईआरटी की हाई लेवल कमेटी द्वारा स्कूली किताबों में ‘India’ की जगह ‘भारत’ नाम लिखने की सिफारिश करना है। इसके साथ ही फिर से देश का नाम बदलने को लेकर चर्चा तेज होने की उम्मीद बढ़ गई है।
बता दें कि ‘भारत’ बनाम ‘इंडिया’ पर चर्चा की शुरुआत तब हुई जब केंद्र ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित जी20 रात्रिभोज के निमंत्रण को “President of India” के बजाय “President of Bharat” के नाम से भेज दिया, जिससे राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। सितंबर में, जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के प्रगति मैदान में भारत मंडपम में जी20 लीडर्स शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, तब उनकी नेमप्लेट पर भी ‘भारत’ प्रदर्शित किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 1 (1) में हमारे देश का नाम “इंडिया, अर्थात भारत राज्यों का संघ होगा” परिभाषित किया गया है। अब एनसीईआरटी की किताबों का एक नया दस्ता जारी किया जाएगा। नई किताबों में बच्चे अब इंडिया नहीं, बल्कि भारत पढ़ेंगें।

राष्ट्रपति ने G20 के न्‍योते में India की जगह लिखा था भारत

G20 समिट 2023 के समय देश का नाम बदलने की खूब चर्चा हुई। कहा गया कि India की जगह ‘भारत’ लिखा जाएगा। राष्ट्रपति ने G20 के न्‍योते में India की जगह भारत लिखकर भेजा। फिर G20 के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेमप्‍लेट पर भी ‘भारत’ लिखा गया। उसके बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया गया तो फिर उस चर्चा ने जोर पकड़ लिया। हालांकि, ऐसा कुछ हुआ नहीं। अब स्कूली किताबों में देश का नाम बदलने की सिफारिश की गई है। नैशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की हाई लेवल कमिटी ने यही सिफारिश की है। कमिटी के चेयरपर्सन सीआई आइजैक ने कहा कि स्‍कूली करिकुलम में India को हटाकर ‘Bharat’ किया जाना चाहिए। एक और सिफारिश की गई है कि करिकुलम से एंश‍ियंट हिस्ट्री को बाहर कर उसकी जगह ‘क्‍लासिकल हिस्ट्री’ पढ़ाई जाए।

तर्क, अंग्रेजों ने दिया India नाम, भारत है देश का प्राचीन नाम’

आइजैक ने कहा कि सात सदस्यों वाली समिति ने एकमत से यह सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि ‘भारत युगों पुराना नाम है। भारत नाम का इस्तेमाल विष्णु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है जो 7,000 साल पुराना है।’ आइजैक ने कहा, ‘इंडिया शब्द का प्रयोग आमतौर पर ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना और 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद ही किया जाने लगा।’ इसलिए कमिटी ने सर्वसम्मति से सुझाव दिया है कि सभी कक्षाओं की किताबों में India की जगह भारत नाम यूज किया जाए।

समिति की चली तो इतिहास पढ़ाने का बदलेगा अंदाज

आधिकारिक रूप से भारत नाम पहली बार G20 शिखर सम्मेलन के दौरान लिखा गया। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की ओर से दिए गए डिनर इनवाइट में ‘President of India’ की जगह ‘President of Bharat’ लिखा गया। इसपर विपक्षी दलों ने खूब हल्ला मचाया। फिर G20 के मंच से पीएम मोदी की नेमप्‍लेट पर भी ‘Bharat’ लिखा नजर आया। आइजैक ने कहा कि बताया कि NCERT ने 2021 में विभिन्न विषयों पर पेपर तैयार करने के लिए 25 समितियां बनाई थीं। उनकी समिति भी इन्‍हीं में से एक है। इस समिति ने पाठ्यपुस्तकों में ‘प्राचीन इतिहास’ के बजाय ‘शास्त्रीय इतिहास’ को शामिल करने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि ‘अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को तीन चरणों में विभाजित किया – प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक जिसमें भारत को अंधकार में दिखाया गया, वैज्ञानिक ज्ञान और प्रगति से अनभिज्ञ दिखाया गया। हालांकि, उस युग में भारत की उपलब्धियों के कई उदाहरणों में आर्यभट्ट का सौर मंडल मॉडल पर काम शामिल है।’

महीनों पहले रखा गया था प्रस्ताव

पैनल के सदस्यों में से एक सीआई इस्साक (CI Issac) के मुताबिक, पैनल के सभी सदस्यों ने ‘INDIA’ को बदलकर ‘Bharat’ करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। यह प्रस्ताव कुछ महीने पहले रखा गया था और अब, जबकि प्रस्ताव स्वीकार किया जा चुका है तो एनसीईआरटी की नई किताबों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ मुद्रित किया जाएगा। आइजैक ने कहा, ‘इसलिए, हमने सुझाव दिया है कि भारतीय इतिहास के शास्त्रीय काल को मध्यकालीन और आधुनिक काल के साथ स्कूलों में पढ़ाया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि समिति ने पाठ्यपुस्तकों में ‘हिंदू विजयों’ को हाईलाइट करने की भी सिफारिश की है। आइजैक भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) के सदस्य भी हैं। इसके अलावा, समिति ने सभी विषयों के पाठ्यक्रराष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, यानी एनसीईआरटी की किताबों में जल्द ही एक बदलाव देखने को मिल सकता है। दरअसल, एनसीईआरटी द्वारा गठित एक समिति ने किताबों में ‘INDIA’ को बदलकर ‘Bharat’ करने की सिफारिश की थी।

लागू हो भारतीय ज्ञान प्रणाली

इसी के साथ समिति के अध्यक्ष सी आई इस्साक ने यह भी बताया कि एनसीईआरटी पैनल ने सभी विषयों के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणाली (Indian Knowledge System) को शामिल करने की सिफारिश की है। पैनल द्वारा पुस्तकों के अगले सेट में इंडिया के बजाय ‘भारत’ प्रिंट करने के प्रस्ताव को सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। पैनल के सदस्यों में से एक ने इस बात की पुष्टि की है।