गाय को राज्यमाता का दर्जा दे सरकार : अविमुक्तेश्वरानंद

दिलीप सिंह
रायबरेली। शनिवार को जनपद आगमन पर ज्योतिष पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चंदा चोरी और गाय को माता का दर्जा नहीं दिए जाने पर भाजपा सरकार पर करारे प्रहार किए। इससे पहले उनकी 81 दिवसीय गौ रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ। जगतगुरु पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने शहर रायबरेली स्थित सुपर मार्केट पार्क में आमजनों को संबोधित करते हुए कहा कि देश व प्रदेश में बनावटी नकली हिंदू राज कर रहे हैं। गाय माता को राष्ट्रीय पशु घोषित नहीं कर रहे गाय का अस्तित्व संकट में है। भाजपा सरकार के संरक्षण में गाय को कट रही है। भाजपा धर्म के नाम पर व्यापार कर रही है। यह भगवान के नाम पर चंदा चोरी कर रहे हैं। आगामी चुनाव में भाजपा वोट नहीं देकर गौ माता का सम्मान एवं धर्म की रक्षा करना है। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के ज़िलाध्यक्ष इ.वीरेंद्र यादव, पूर्व प्रत्यासी सुरेश निर्मल, आरपी यादव, प्रदीप तिवारी, ओपी यादव, सुरेश यादव, नरेंद्र सिंह प्रधान, पारुल बाजपेयी, महेश गुप्ता, विश्वास सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सरकार को गाय को राज्यमाता का दर्जा देना चाहिए। ऊंचाहार में आयोजित सभा में शंकराचार्य ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी नीतियां गौ संरक्षण के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने विभिन्न राज्यों में गौमांस से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। साथ ही अयोध्या मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर भी सरकार की आलोचना की। इसके बाद डलमऊ पहुंचे शंकराचार्य ने गौशालाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गायों की दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई कि गाय को पशु नहीं, बल्कि माता मानते हुए उसे पशु सूची से हटाकर राज्यमाता का दर्जा दिलाने के लिए जनजागरण किया जाएगा।

हरचंदपुर में विधायक राहुल लोधी ने स्वागत किया। इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार के रवैये आलोचना की। खीरों में उन्नाव सीमा से जनपद में प्रवेश पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान सपा विधायक राहुल लोधी समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सेमरी चौराहे पर समाजसेवी नयन शुक्ला के नेतृत्व में भी उनका जोरदार स्वागत हुआ। इसके बाद बछरावां होते हुए तिलेंडा पहुंचे, जहां पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद रात्रि विश्राम किया।
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