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कार्रवाई ने खोली शिक्षा माफियाओं के संरक्षण की पोल

कार्रवाई ने खोली शिक्षा माफियाओं के संरक्षण की पोल

डीआईओएस की गतिविधियां और आरडीए की कार्यशैली पर गंभीर आरोप

रायबरेली। जिला प्रशासन द्वारा छापेमारी कर सील किये गये शहर के 12 कोचिंग संस्थान और लाइब्रेरी ने डीआईओएस की गतिविधियों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अवैध रूप से संचालित सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को मिल रहे संरक्षण ने डीआईओएस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश सरकार की छवि को धूमिल करने वाले डीआईओएस जैसे जिम्मेदारों की सरपरस्ती में संचालित कोचिंग संस्थानों पर जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई बड़ा कदम माना जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला विद्यालय निरीक्षक की भूमिका और कार्यशैली पर तीखी आलोचना भी सामने आ रही है।
शहर से लेकर कस्बों व तहसीलों में लंबे समय से मानकविहीन तरीके से संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों पर डीआईओएस स्तर से लखनऊ में हुए अग्निकांड में हुई बच्चों की मौत से पूर्व  कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे शिक्षा माफियाओं को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिलना प्रतीत हो रहा। सकरी गलियों संचालित कई कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों, भवन और अग्नि सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी के बावजूद कार्रवाई का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। लखनऊ में हाल ही में हुए अग्निकांड में छात्रों की मौत के बाद भी स्थानीय स्तर पर किसी ठोस कदम का न उठाया जाना डीआईओएस की जिम्मेदारी व व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन संस्थानों पर जांच और कार्रवाई नहीं की गई तो इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसी बीच भवन निर्माण से जुड़े मामलों में भी रायबरेली विकास प्राधिकरण की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि कई भवनों में नियमों की अनदेखी के बावजूद निर्माण कार्य को पूरा होने से नहीं रोका गया। इससे आरडीए के जिम्मेदारों की संलिप्तता और मिलीभगत होना प्रतीत होता है। शहर में यह भी चर्चा है कि यदि इसी तरह मानकविहीन कोचिंग संस्थान बिना रोक-टोक संचालित होते रहे, तो भविष्य में किसी बड़ी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है। कोचिंग संस्थानों के नियंत्रणकर्ताओं की लापरवाही का खामियाजा लखनऊ के अलीगंज में संचालित कोचिंग में लगी आग में जिंदा जलकर बच्चों को अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी थी। इस भीषण हादसे के बाद एक्शन में आई डीएम सरनीत कौर ब्रोका के निर्देश पर एडीएम प्रशासन व अन्य अधिकारियों ने विभिन्न कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया था जिसमें तमाम खामियां मिलने के बाद 12 संस्थानों को सीज करने की कार्रवाई की गई थी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस घटना के पूर्व में कभी भी डीआईओएस द्वारा मनमाने तरीके से संचालित कोचिंग संस्थानों के शिक्षा माफियाओं पर कार्रवाई नहीं की गई। इस संबंध में डीआईओएस संजीव कुमार सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका मोबाइल फोन नाट रीचेबल बता रहा था।

विभाग के जिम्मेदारों पर क्या बोले नागरिक

विकास नगर निवासी मनमोहन शुक्ल का कहना है कि “कार्रवाई अच्छी है, लेकिन हादसे का इंतजार क्यों किया गया? अगर पहले जांच होती तो छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता कम होती।” इंदिरा नगर की रहने वाली किरन त्रिपाठी का कहना है कि “कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन यह केवल दिखावा न बने। सभी संस्थानों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।” देवानंदपुर के सभासद जय प्रकाश वर्मा ने कहा कि “लखनऊ में हुई बच्चों की मौत के जिम्मेदार लापरवाह अधिकारी हैं। घटना होने से पूर्व ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करनी चाहिए। घटना के बाद भले ही कार्रवाई की जा रही हो, लेकिन वह भी सिर्फ दिखावा मात्र ही है। बच्चे अनमोल धरोहर हैं इनकी सुरक्षा महत्वपूर्ण है। गोरा बाजार के सभासद कमरुद्दीन आसिफ ने कहा कि “केवल संस्थानों को सील करना पर्याप्त नहीं है। यह भी जांच होनी चाहिए कि संबंधित विभागों ने निगरानी में कहीं लापरवाही तो नहीं बरती।” जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में चलने वाले कोचिंग संस्थानों व उनके विरुद्ध भी कार्रवाई करना आवश्यक है।

“नगर क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों की जांच कराई जा रही है। मानकविहीन चलने वाले संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जा रही है। अब तक 12 संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जा चुकी है। ऐसे संस्थानों के संचालकों को नोटिस भेज कर अव्यवस्थाओं पर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।”

राम अवतार
नगर मजिस्ट्रेट