राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के दांव से रायबरेली की सदर सीट पर बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं
रायबरेली। जिले की सियासत में एक बार फिर सिंह परिवार चर्चा के केंद्र में है। पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की बहन और सदर से भाजपा विधायक अदिति सिंह की बुआ पूनम सिंह ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। पूनम सिंह के सपा में शामिल होने के बाद जिले की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और सदर विधानसभा क्षेत्र के चुनावी समीकरणों को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
सामाजिक सरोकारों से जुड़ीं पूनम सिंह ने शनिवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति में सदस्यता ग्रहण की। इस अवसर पर उन्होंने पार्टी के श्री अखिलेश यादव जी के नेतृत्व और समाजवादी विचारधारा में विश्वास व्यक्त करते हुए पार्टी के साथ मिलकर जनसेवा का संकल्प लिया। सदस्यता ग्रहण करने के बाद पूनम सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए निरंतर संघर्ष करने वाला संगठन है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें संगठन से जुड़कर जनता के बीच काम करने का अवसर मिला है। पूनम सिंह ने कहा कि वह महिलाओं, युवाओं, किसानों, गरीबों और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने तथा समाजवादी पार्टी की नीतियों एवं विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन में संगठन को मजबूत करने तथा जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाना उनका प्रमुख उद्देश्य रहेगा। सदस्यता ग्रहण के अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने पूनम सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।
पूनम सिंह की सपा में एंट्री इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि उनका सीधा संबंध उस राजनीतिक परिवार से है, जिसका रायबरेली सदर की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में उनके सपा में शामिल होने को केवल पार्टी बदलने के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे सदर की सियासत में एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।
नई राजनीतिक चुनौती के संकेत
सदर से भाजपा विधायक अदिति सिंह और पूनम सिंह के बीच पारिवारिक रिश्ता होने के कारण इस घटनाक्रम को राजनीतिक तौर पर और अहम माना जा रहा है। यदि पूनम सिंह सदर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय होती हैं तो इससे भाजपा और सपा के बीच मुकाबले के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर राजनीतिक समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि चुनावी मैदान में तस्वीर अभी दूर है और पूनम सिंह की भूमिका को लेकर पार्टी की ओर से कोई औपचारिक संकेत सामने आना बाकी है। इसके बावजूद उनकी सपा में एंट्री ने सदर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है।
सपा की रणनीति पर टिकी निगाहें
पूनम सिंह को पार्टी में शामिल कराकर सपा ने रायबरेली की राजनीति में अपनी मौजूदगी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पार्टी उन्हें किस भूमिका में आगे बढ़ाती है। यदि उन्हें सदर क्षेत्र में सक्रिय किया जाता है तो आने वाले समय में यहां राजनीतिक मुकाबला और रोचक हो सकता है। अब देखना होगा कि यह राजनीतिक कदम सिर्फ संगठन विस्तार तक सीमित रहता है या आने वाले चुनाव में सदर विधानसभा सीट के समीकरणों पर इसका वास्तविक असर दिखाई देता है।
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