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टूटी खिड़कियों से वार्डों में घुस रही मच्छरों की फौज

अस्पताल में मरीजों पर “मच्छरों” का “अटैक”, जिम्मेदार बेपरवाह

 

अमरेंद्र कुमार

रायबरेली। जिला पुरुष चिकित्सालय में मरीजों को इलाज के साथ-साथ अव्यवस्थाओं का भी सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई वार्डों में टूटी खिड़कियां, गायब जालियां और बेडों के नीचे डस्टबिन न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। भीषण गर्मी के बीच खुले रास्तों से वार्डों में प्रवेश कर रहे मच्छर रातभर मरीजों की नींद में खलल डाल रहे हैं, जिससे संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

 

जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 7, 8, 9 और 10 में कई महीनों से खिड़कियां क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इनमें लगी सुरक्षा जालियां भी गायब हैं, जिसके कारण शाम होते ही मच्छरों का आतंक शुरू हो जाता है। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि रात के समय वार्डों में रुकना मुश्किल हो जाता है। मच्छरों से बचाव के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था भी नजर नहीं आती। सिर्फ खिड़कियों की समस्या ही नहीं, बल्कि वार्ड नंबर 11, 12, 13 और 14 सहित अन्य वार्डों में अधिकांश बेडों के नीचे डस्टबिन भी नहीं हैं। इससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है और मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी स्थिति स्वच्छ भारत अभियान और स्वास्थ्य मानकों पर भी सवाल खड़े कर रही है।

सूत्रों के अनुसार अस्पताल की व्यवस्थाओं की निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी अस्पताल मैनेजर डॉ. बीआर यादव पर तय है, लेकिन लंबे समय से चली आ रही इन समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम दिखाई नहीं दे रहा। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में जिला अस्पताल के वार्डों में व्याप्त अव्यवस्थाएं मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

 

दीवार से टिके मरीजों के अधिकार, कौन पढ़ेगा संदेश

जिला पुरुष अस्पताल में मरीजों को उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए लगाए गए सूचना बोर्ड स्वयं ही उपेक्षा का शिकार हैं। वार्ड संख्या 2 और 3 के बीच मरीज अधिकारों से संबंधित होर्डिंग कई दिनों से दीवार के सहारे रखा हुआ है, जिसे अब तक उचित स्थान पर नहीं लगाया गया है। अस्पताल की कई दीवारों पर लिखे संदेश और निर्देश दूर से तो सजावटी लगते हैं, लेकिन ग्रामीण मरीजों के लिए उनका अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता। इससे जागरूकता का उद्देश्य कमजोर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि यदि बोर्ड प्रमुख स्थानों पर हों, तो जानकारी अधिक प्रभावी रूप से पहुंच सकती है।

 

दवा काउंटर या स्ट्रेचर पार्किंग जोन

जिला पुरुष अस्पताल में मरीजों की सुविधा की जगह व्यवस्थागत अव्यवस्था सामने आ रही है। दवा वितरण के लिए केवल चार काउंटर होने से पहले ही लंबी कतारें लगती हैं, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशानी होती है। ऐसे में काउंटरों के सामने स्ट्रेचर खड़े कर दिए जाने से आवाजाही का रास्ता और संकरा हो जाता है। इसका सीधा असर मरीजों की सुविधा पर पड़ रहा है और असंतोष बढ़ रहा है।

 

 

  • अस्पताल में मरम्मत का कार्य चल रहा है। वार्डों में जो अव्यवस्थाएं हैं उसकी मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है। बहुत जल्द यह कार्य पूरा करा दिया जाएगा। मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

 

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार

सीएमएस, जिला पुरुष चिकित्सालय