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साहब! कुत्तों को आराम, मरीजों का कौन है जिम्मेदार?

साहब! कुत्तों को आराम, मरीजों का कौन है जिम्मेदार?

कभी ब्लड बैंक तो कभी अस्पताल के अन्य परिसर में रहता है कुत्तों का अड्डा, जिम्मेदारों को नहीं दिखता खतरा!
अमरेन्द्र कुमार 
रायबरेली। जिला पुरुष चिकित्सालय में इन दिनों इलाज से ज्यादा आवारा कुत्तों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। कभी रक्त बैंक परिसर तो कभी अस्पताल के दूसरे कोनों में आराम फरमाते और मरीजों के बीच टहलते कुत्ते सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि परिसर में खुलेआम घूम रहे ये कुत्ते कभी भी किसी के लिए खतरा बन सकते हैं। चर्चा इस बात की भी है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस समस्या पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। अस्पताल की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे मैनेजर डॉ. बीआर यादव की कार्यशैली को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। आरोप हैं कि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के बजाय उनका ध्यान अन्य गतिविधियों में अधिक रहता है, जिससे अस्पताल की मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। फिलहाल कुत्तों की “मौज” और मरीजों की “चिंता” साथ-साथ चल रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो किसी अप्रिय घटना के बाद ही व्यवस्था की नींद टूटने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। तब शायद अस्पताल परिसर को कुत्तामुक्त बनाने की कवायद शुरू हो।

आवारा कुत्ते कर रहे “राउंड”, मैनेजर साहब आउट ऑफ फोकस!

      जिला चिकित्सालय के ओपीडी, ब्लड बैंक, पर्चा काउंटर और दवा वितरण केंद्र व हर उस कोने में जहां जीवन बचाने की निरंतर कोशिशें होती हैं। वहीं परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक अस्पताल के भीतर कुत्तों की मौजूदगी नजर आती है। इन कुत्तों के लिए कोई रोक-टोक नहीं है। मरीजों की भीड़ के बीच इनका बेखौफ घूमना किसी भी वक्त खतरे में बदल सकता है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी इस खतरे को और बढ़ा रही है। अस्पताल की अव्यवस्था का आलम यह है कि जहां साफ-सफाई, सुरक्षा और अनुशासन की सख्त जरूरत होती है, वहां हर स्तर पर लापरवाही नजर आती है। कुत्तों का इस तरह अंदर तक पहुंच जाना सिर्फ गार्डों की नाकामी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के फेल होने का साफ संकेत है। मरीज और उनके तीमारदार इस हालात से बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में पहले ही बीमारी का बोझ होता है, ऊपर से इस तरह का माहौल डर और असहजता पैदा करता है। कई लोग तो कभी-कभी देखे जाते हैं कुत्तों की वजह से अस्पताल के अंदर जाने से भी कतराने लगते हैं।
8 जून 2026 को हनुमान मंदिर के सामने से जिला अस्पताल के अंदर जाने वाले रास्ते में बैठे तीमारदारों के आराम फरमाते आवारा कुत्ते।

जिला अस्पताल के मैनेजर डॉ. बीआर यादव की मेहरबानी, अस्पताल में कुत्तों की मनमानी!

फिलहाल अस्पताल में आवारा कुत्तों की दिनभर की आवाजाही पर निगरानी न रख पाने वाले अस्पताल के मैनेजर डॉ. बीआर यादव के घटिया कार्यशैली व लापरवाही का नतीजा है। इसको लेकर लगातार मैनेजर गंभीरता से लेने के बजाय अनदेखा करते नजर आते हैं। यही वजह है कि समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है और कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ रहा। जिला अस्पताल जो भरोसे और इलाज का केंद्र होना चाहिए अब यहां पर अव्यवस्था और लापरवाही चरम पर है। अगर जल्द ही इस “कुत्तों के कब्जे” और बदहाल व्यवस्था का समाधान नहीं किया गया, तो यह डर और असुरक्षा किसी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

सलीके से कम गुर्राकर तीमारदारों से ज्यादा बात करते हैं गार्ड! अंदर घूमते कुत्तों का क्या?

अस्पताल में गेट पास अब जरूरत नहीं, मजबूरी बन चुका है। तीमारदारों का कहना है कि कई बार आपात स्थिति में भी उन्हें अंदर जाने से रोक दिया जाता है। गार्डों की सख्ती सिर्फ आम लोगों तक सीमित है। सीएमएस के निर्देशों के बावजूद सुरक्षा गार्डों की भूमिका बेहद संदिग्ध नजर आती है। विडंबना यह है कि जिन लोगों को वार्ड में जाना जरूरी होता है, उन्हें गेट पास के नाम पर रोक दिया जाता है और अपमानित तक किया जाता है। वहीं दूसरी ओर, अनाधिकृत लोग और आवारा कुत्ते बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल के हर कोने में घूमते रहते हैं। अस्पताल में जहां मरीज बैठे होते हैं वहां मौजूद सुरक्षा गार्ड पहले से बैठे व घूमते कुत्तों को नहीं रोकते। जो मरीजों की जान पर भारी पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही सुरक्षा व्यवस्था है, तो मरीजों की हिफाजत का जिम्मा आखिर किसके भरोसे है?
  • जिला अस्पताल में मरीजों व तीमारदारों की सहायता के लिए सुरक्षा गार्ड लगाए गए हैं। अस्पताल में अनावश्यक और फर्जी लोगों की भीड़ न जमा हो इसके लिए सुरक्षा गार्डों को निर्देशित किया गया है। अस्पताल में आवारा कुत्तों जैसी कोई समस्या नहीं है। कुत्तों पर विशेष तौर पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
  • डॉ. पुष्पेंद्र कुमार
  • सीएमएस, जिला पुरुष चिकित्सालय रायबरेली।