शुभाशीष संस्थान के निदेशक का सुझाव, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म से बनेगा जागरुकता का मजबूत नेटवर्क

अमरेंद्र कुमार
रायबरेली। दिव्यांगजनों के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण को मजबूत आधार देने की दिशा में डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल की है। विश्वविद्यालय रायबरेली जनपद के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभागों, शुभाशीष संस्थान तथा विभिन्न सामाजिक संस्थानों के संयुक्त सहयोग से महात्मा गांधी सभागार में आयोजित विभागीय बैठक में समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।
बैठक में कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को आत्मनिर्भर, सक्षम और समाज के लिए उपयोगी नागरिक के रूप में तैयार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “सेवा, संवेदना और सहयोग आधारित शिक्षा ही हमारा मूल ध्येय है, और इसी दिशा में विश्वविद्यालय निरंतर कार्य कर रहा है।” कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक संरचना, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों, छात्रवृत्ति सुविधाओं और दिव्यांगजन-अनुकूल वातावरण की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव साझा करते हुए बताया कि प्रयागराज और वाराणसी में क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर) स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है, जिससे दिव्यांग विद्यार्थियों को उनके गृह क्षेत्र के निकट ही गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, परामर्श एवं शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध हो सकेगा।
बैठक में शुभाशीष संस्थान के निदेशक ऐश्वर्य श्रीवास्तव ने दिव्यांगजनों के कल्याणकारी कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आधुनिक संचार माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया आधारित जागरुकता अभियान, डिजिटल प्रमोशन तथा इन्फ्लुएंसर्स सहयोग को प्रभावी रणनीति बताया। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय न्यास की “निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना” के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया। जिला समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधि मोहन त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा व्यवस्था की सराहना की। इसके अलावां विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा दिव्यांगजनों की शिक्षा एवं कल्याण से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा की। सह-आचार्य डॉ. विजय शंकर शर्मा ने विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रमों एवं पात्रता मानदंडों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में अनेक विभागीय अधिकारी, प्राचार्य एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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